कैसे हुआ सूरज का निर्माण, जाने इसके बारे में रोचक तथ्य

हमारे लिए सूरज का अर्थ है सुबह आकाश में चमकता हुआ एक आग का गोला जो हम सभी के लिए जीवनदायनीय है।
सूर्य हमारे सौरमंडल के बीच मे स्थित एक तारा है जिसके चारो ओर हमारी पृथ्वी चक्कर लगाती है. आज हम इस लेख में सूरज से जुड़ी बहोत ही रोचक जानकारियों के बारे में बात करेंगे और सूरज से जुड़े अद्भुत तथ्यों को जानेंगे-

suraj ki uatptti

सूरज से जुड़े कुछ रोचक तथ्य-

सूरज एक G-टाइप मुख्य अनुक्रम तारा है जो कि सौरमंडल के पूरे द्रव्यमान का लगभग 99.86% समाविष्ट करता है.यह करीब करीब पूरा गोलाकार है लेकिन अनुमान ये है कि यह अपने नब्बे लाखवें भाग में चपटा है. जैसा कि सूर्य प्लाज्मा का बना है और ये ठोस नही है, यह अपनी ध्रुवों की अपेक्षा अपने भूमध्य रेखा पर ज्यादा तेजी से घूमता है.

सूरज पर बड़े बड़े काले धब्बे है जिसे सौर्य कलंक के नाम से जाना जाता है ये धब्बे समय के साथ आकर में और संख्या में बदलते रहते हैं हर ग्यारह साल बाद इन सौर्य कलंकों की संख्या बढ़ जाती है. ये धब्बे इसलिए बनते है क्योकि इन स्थानों का तापमान सूर्य के और जगह के तापमान से कम होता है जिससे वो काले प्रतीत होते है इसका अधिकतम भाग हाइड्रोजन और हीलियम से बना है.सूरज आकर में इतना बड़ा है कि इसमें 109 धरतियाँ समा सकती है.सूरज से सतह का तापमान लगभग छह हजार केल्विन डिग्री होता है। सूरज से जुड़ा एक रोचक तथ्य ये है कि यह धीरे धीरे गर्म हो रहा है लगभग एक खरब साल में ये लगभग 10% गर्म हो जाता है।सूरज गर्म होने के साथ साथ बड़ा भी हो रहा है और लगभग सात खरब सालो बाद वह इतना बड़ा हो जाएगा कि पृथ्वी को अपने अंदर समा लेगा।

कैसे हुआ सूर्य का निर्माण

आज से लगभग 4.57 अरब वर्ष पहले एक विशाल आण्विक बादल के हिस्से के ढहने से गठित हुआ है जो कि ज्यादातर हीलियम और हाइड्रोजन का बना है.कम्प्यूटर मॉडलों के प्रयोग से  यह पता लगाया गया 4.567 अरब वर्ष पूर्व अल्पजीवी आइसोटोपो के स्थिर नाभिक के निशान दिखते है, जो कि अल्पजीवी विस्फोटित तारों से निर्मित होता है, यह ये दर्शाता है कि जिस स्थान पर सूर्य बना वहां या इसके आसपास एक या एक से अधिक सुपरनोवा अवश्य पाए जाने चाहिए जिससे कि किसी किसी नजदीक की सुपरनोवा से नकली आघात तरंग आण्विक बादल के भीतर के गैसों को संपीडित कर सूर्य का निर्माण सुरु किया होगा और उसके कुछ क्षेत्र अपने आप गुरुत्वाकर्षण के कारण ढहने से बने होंगे।
जैसे ही कोई बादल का टुकड़ा ढहा और कोणीय संरक्षण के कारण घूमने लगा और बढ़ते हुवे दबाव से गर्म होने लगा जिससे बहुत बड़ी द्रव्य राशि केंद्रित हुई और शेष बाहर की तरफ चपटकार डिस्क में बदल गया जिससे कि अन्य ग्रह और सौरमंडलीय पिंड बने।बदल के अंदर गुरुत्विय दाब से अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न हुवी और डिस्क के आसपास और अधिक गैसों में जुड़ती गयी, जिसके बाद नाभिकीय संलयन को सक्रिय किया इस तरह से सूरज का निर्माण हुआ।

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